The Ashes of Chittorgarh: Rani Padmini's Immortal Legend
The epic 1303 siege of Chittorgarh, where Queen Padmini's beauty sparked a war, and Rajput honor chose the ultimate sacrifice over surrender.
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The epic 1303 siege of Chittorgarh, where Queen Padmini's beauty sparked a war, and Rajput honor chose the ultimate sacrifice over surrender.
Full transcript of The Ashes of Chittorgarh: Rani Padmini's Immortal Legend
साल 1303... एक ऐसी रानी जिसकी सुंदरता ने एक पूरे साम्राज्य को राख कर दिया। यह कहानी है चित्तौड़गढ़ की रानी पद्मिनी की, जिनकी एक झलक पाने के लिए दिल्ली का सुल्तान पागल हो गया था। सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने रानी को पाने की जिद में अभेद्य चित्तौड़गढ़ किले की घेराबंदी कर दी। महीनों की नाकामी के बाद, खिलजी ने एक शर्त रखी... सिर्फ आईने में रानी का अक्स देखने की। राजा रावल रतन सिंह ने शांति के लिए यह बात मान ली। लेकिन अक्स देखते ही खिलजी के मन में धोखा जाग उठा। उसने धोखे से राजा को बंदी बना लिया। तब रानी पद्मिनी ने एक निडर योजना बनाई। उन्होंने सैकड़ों पालकियां सुल्तान के शिविर में भेजीं। पर उनमें दासियां नहीं, बल्कि हथियारबंद राजपूत योद्धा छिपे थे! उन्होंने राजा को तो आज़ाद करा लिया... लेकिन अपमान की आग में जलते खिलजी ने अपनी पूरी ताकत के साथ किले पर फिर हमला कर दिया। हार निश्चित थी। पर राजपूती शान को झुकना मंजूर नहीं था। दुश्मनों के हाथ लगने से बेहतर, रानी पद्मिनी और हजारों महिलाओं ने 'जौहर' चुना। धधकती आग में कूदकर उन्होंने अपने सम्मान की रक्षा की। और राजा रतन सिंह के नेतृत्व में राजपूत शूरवीरों ने अपना आखिरी 'साका' किया। वो तब तक लड़े जब तक उनकी सांसें नहीं थम गईं। जब खिलजी किले में घुसा, तो उसे रानी नहीं... सिर्फ राख, सन्नाटा और एक कभी न मिटने वाली हार मिली। यह सिर्फ एक इतिहास नहीं, स्वाभिमान की वो अमर गाथा है जो आज भी गूंजती है।